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पहली बार निर्यात आंकड़ा पंहुचा 10000 हजार करोड़ के पार –पढ़े कारपेट कोम्पक्ट का नया अंक ;

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद् के चुनाव में आज सभी ६ सदस्यों को निर्विरोध निर्वाचन | उत्तर प्रदेश से प्रथम उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह और तीन सदस्य में अब्दुल रब जफर हुसैनी, राजेंद्र मिश्र ,और जम्मू कश्मीर से सेकेंड उपाध्यक्ष उमर हमीद सहित एक सदस्य पप्पू वाटल और रेस्ट ऑफ़ इंडिया से बोधराज मल्होत्रा ||Amendment In Duty Drawback Rates On Carpets And Other Floor Coverings Of Man Made Fibres For The Year 2016-17 Effective From 15th January, 2017. ,,सीईपीसी के चुनाव की सरगर्मी बढ़ी ,,डोमोटेक्स में सम्मानित भदोही के नुमान वजीरी से मिले मुख्यमंत्री || DOMOTEX - दो भारतीय कालीनों को मिला बेस्ट पानीपत में विशेष कारपेट कलस्टर स्थापित होगा : स्मृति || कि अब तक पानीपत के DOMOTEX 2017 Winners of the Carpet DOMOTEX 2017 AFTER REPORT - puts fresh wind in the sails of the global floor coverings industryDesign Awardsडिजाईन अवार्डत्री

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GST exemption withdrawn for hospital equipment, Export Oriented Units

NEW DELHI: The GSTCouncil has decided to withdraw the exemption from countervailing duty (CVD), equal to excise duty, which is currently available to certain hospital equipment and 100% Export Oriented Units(EOUs), on import of all goods. This will make them liable to pay Integrated Goods and Services Tax (IGST) once the new regime kicks in from the scheduled date on July 1.

Import of equipment by government hospitals and those run by societies will be subject to full rate of IGST, as existing concessional rate of 6% CVD will not be available. This will impact hospital equipment and their parts and accessories, although basic customs duty exemption will be available, said tax lawyer R S Sharma.

While the GST Council has restricted the exemption from IGST to only specified category of importers, such as units in special economic zones (SEZs) and developers of these zones, the benefit has not been extended to EOUs.

"EOUs will henceforth will be liable to pay IGST on imports and can avail credit of IGST paid, which can be used by them for local supply of goods manufactured by them. They will also be entitled for a refund of IGST in case of excess accumulation of credit due to export," said Sharma.

The EOUs are, however, still hopeful of getting the benefits that are currently available to them.

"Discussion on IGST for export promotion schemes is going on. EOUs are also an export promotion scheme. So we expect that it may also be exempted from IGST. If it is not the case then duty has to be paid and refund has to be sought after exports, which will lead to increase in the cost of working capital, thereby leading to an increase in the cost of product. This will make Indian products less competitive in the international markets," said Rahul Gupta, chairman, Export Promotion Council for EOUs & SEZs.

Similarly, import of all consumer goods in packaged form with specified MRP, which are meant for trading, are at present exempt from 4% special additional duty, which is levied in lieu of VAT. It will now be subject to tax at full rate of IGST on imports.

GST to benefit common man: PM


Prime Minister Narendra Modi on Monday reviewed the status of GST, which is to be implemented from July 1, and said the new regime will benefit the common man.


During the two-hour meeting, Modi reviewed the IT and HR preparedness, query handling mechanism, and monitoring. "The Prime Minister was informed that GST systems such as IT infrastructure, training of officials, integration with banks, and enrolment of existing taxpayers will be in readiness well in time for the July 1 implementation date. Information security systems were discussed in detail," an official statement said.


Modi also directed that maximum attention should be paid to cyber-security in IT systems concerned with GST.



खाद्य प्रसकरण के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए वाराणसी में जुटेंगे दुनिया भर के एक्सपर्ट - विनय शुक्ल

इंडो अमेरिकन चैम्बर आफ कामर्स उत्तर प्रदेश द्वारा वाराणसी में खाद्य प्रसकरण के क्षेत्र में नए अवसरों को बढ़ावा देने के एक सेमिनार का आयोजन कर इस क्षेत्र में नए अवसरों की तलाश करेगी इस
सेमिनार देस और दुनिया के एक्सपेक्ट जुटेंगे इस कृषि सेमिनार के सेमिनार (भारत- अमेरिकी उद्देगों में प्रभावी आधार के रुप में खाद्य प्रसंस्करण वाणिज्य में नये अवसर) विषय पर आयोजित हैं। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण  में नई तकनिक का उपयोग, वैश्विक स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्दोगों की विशेषताए, व्यापारिक मानदण्ड स्थापित करने के लिए तकनिक का उपयोग, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में विदेशी निवेश की संभानाएँ तथा अमरिकी कंपनियो को भारत में दि जाने वाली सुभिदायें हैं।
यह जानकारी होटल रेजेन्सी में आईएसीसी द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में आईएसीसी के अघ्यक्ष विनय कुमार शुक्ला ने दिया। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आईएसीसी के पूर्व अरुण कुमार अग्रवाल ने कहा कि यह सेमिनार कृषि से संबधित हैं। सेमिनार के माध्यम से हम अमेरिकी इन्वेस्टरों को प्रभावित करने की एक पहल कर रहे हैं ताकि हमारे पूर्वांचल का विकास हो सके। सेमिनार में हमने पूरे पूर्वांचल से किसानों को भी आमंत्रित किया है, जो अच्छे उत्पादक हैं। यह सेमिनार होटल मदिन में दिनांक 24 जून को सुबह 9 से शाम 6 बजे तक आयोजित होगा। कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथियों में स्काट एस. सिंदेलार, कार्यवाहक उपाध्यक्ष, साधवी निरंजन ज्योति ( कृषि मामलों के मंत्री सलाहकार, अमेरिकी दूतावास,  खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री, , नई दिल्ली ) केशव प्रसाद मौर्य ( उप मुख्यमेत्री उत्तर प्रदेश ), सूर्य प्रताप शाही हैं।

पत्रकार वार्ता में मुख्य रुप से विनय कुमार शुक्ल, सुब्रतो कुमार पाल, राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य व पूर्व अध्यक्ष  एहसान आर. खान, पूर्व अध्यक्ष अरुण कुमार अग्रवाल तथा सी ए मुकुल  कुमार शाह इत्यादि लोग उपस्थित रहें।

चाइना कारपेट फेयर में भारतीय निर्यातक ने जीता अवार्ड

ग्लोबल को मिले तीन अवार्ड 

भदोही के दो कालीन निर्यातक को मिला अवार्ड

चाइना में भारतीय कालीन डिजाईन को मिला पुरस्कार 

भदोही। चाइना के किंघाई में आयोजित इंटरनेशनल कारपेट फेयर में भारतीय कालीन की श्रेष्ठता देखने को मिली है। यहां कारपेट ट्रेंड की कंपटीशन में कालीन नगरी भदोही की कालीन को तीन अवार्ड मिले हैं। 

भदोही के गोपीगंज स्थित ग्लोबल ओवरसीज कालीन कम्पनी को इस कम्पटीशन में कारपेट डिजाइन ऑफ द ईयर, इंटरनेशनल ट्रेंड ऑफ द न्यू प्रोडक्ट कारपेट व इंटरनेशनल ट्रेंड ऑफ द न्यू प्रोडक्ट कारपेट नॉमिनेशन का अवार्ड इस कम्पनी को मिला है।चाइना तिब्बत एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस कारपेट मेला आयोजित था ,इस  कालीन कम्पनी द्वारा फेयर में वूल व बम्बू सिल्क से बने 'अफ्शर' नाम से कालीन को प्रदर्शित किया गया था जिसकी डिजाइन कम्पनी के पार्टनर बृजेश गुप्ता ने की थी। मॉडर्न डिजाइन की यह कालीन फेयर में वर्ष की सर्वश्रेष्ठ डिजाइन रही। ग्लोबल ओवरसीज इनोवेशन और क्रिएशन के बदौलत कारपेट इंडस्ट्री में अलग पहचान रखती है। इसके पूर्व इस कम्पनी ने जर्मनी के डोमोटेक्स में भी प्रतिष्ठित अवार्ड हासिल किया था।
 इस पुरस्कार के लिए कई देशों के प्रतिभागी थे जिसमें पाकिस्तान ईरान नेपाल सहित कई देश शामिल थे जिनमें भारत के ग्लोबल को तीन और आइडियल को 2 अवार्ड मिले  इस अवार्ड को मिलना भारत के लिए गर्व की बात है इससे भारतीय कालीनों की विश्व ढक बनेगी । भारत के हस्तनिर्मित कालीन का चीन एक उभरता बाजार है ऐसे में पुरस्कार मिलने से भारतीय कालीन की मार्केटिंग में मदद मिलेगी | इससे पूर्व भी ग्लोबल के अवार्ड जीत चुकी है यह कंपनी अपने इनोवेटिव प्रोडक्ट और बेहतर मार्केटिंग के बल भारत की महत्वपूर्ण कंपनियों में शामिल है कम्पनी के पार्टनर संजय गुप्ता ने कहा की कम्पनी अपने इनोवेटिव डिजाईन और आईडिया के बल लगातार आगे बढ़ रही इस पुरस्कार से उनका मनोबल और उचा हुआ यह पुरस्कार भारत निर्यातको दुनिया सम्मान बढेगा  जनपद  के आइडियल कारपेट को भी दो पुरस्कार मिले है |

कालीन निर्यात पहुचा दस हजार करोड़ के पार

पहली बार आंकड़े ने छुआ १० हजार करोड़ 

कपडा मंत्री ने बताई मोदी के तीन वर्ष की उपलब्धि 

निर्यात में १००० हजार करोड़ की वृद्धि


नयी दिल्ली कारपेट कॉम्पैक्ट  मोदी सरकार के तीन वर्षों में हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के भी अच्छे दिन आएं हैं। देश से हस्तनिर्मित कालीनों के निर्यात आंकड़ों में लगातार बढोत्तरी दर्ज की गई है। बीते तीन वर्षों में यह निर्यात आंकड़ा सात हजार करोड़ से बढ़ कर दस हजार करोड़ के पार हो गया है। इस सफलता को लेकर केंद्रीय कपड़ा मंत्री ने ट्वीट कर इसे सरकार के तीन वर्ष के उपलब्धियों में जोड़ते हुए खुशी जताया है।देश में कालीन निर्माण और निर्यात के लिए विश्व भर अपनी पहचान रखने वाला उत्तर प्रदेश के भदोही के कालीन उद्यमियों ने खुसी जताया साथ ही  कालीन निर्यातकों का मानना है सरकार सुविधाओं में बढोत्तरी करती रहे तो निर्यात में इजाफा होता रहेगा। मोदी सरकार के तीन वर्ष होने पर इस बात की चर्चा जोरों पर है कि देश मे कौन-कौन से क्षेत्रों में बदलाव आया है। इन वर्षों में मंदी से जूझ रहे भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की स्थिति में सुधार देखने को मिले हैं। सरकार के आंकड़े कुछ यही कहते हैं कि कालीन उद्योग में 20 फीसदी दर से बढोत्तरी दर्ज की गई है। पूरे देश मे वित्तीय वर्ष 2013-14 में हस्तनिर्मित कालीन उद्योग का निर्यात 6,530 करोड़ से बढ़ कर 7,110 हुआ। 2014 -15  में यह बढ़कर 8,441 वही 2015 -16 में बढ़कर 9481 करोड़ पहुंचा और वित्तीय वर्ष 2016-17 में कपड़ा मंत्री ने ट्वीट कर बताया कि यह उद्योग अब 10,489 करोड़ का हो गया है। बीते एक वर्ष में ही इस उद्योग ने एक हजार की बढोत्तरी की है तो वहीं तीन वर्ष में चार हजार करोड़ से अधिक निर्यात में इजाफा हुआ है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद् , सदस्य प्रशासनिक समिति , अब्दुल रब का ने बताया की  इस सफलता से कालीन उद्योग से जुड़े लोग यह मानते हैं कि अगर सुविधाओं में बढोत्तरी होती रहे तो निश्चित ही निर्यात बढ़ेगा। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के अब्दुल रब का कहना है कि परिषद द्वारा भारत मे दो कार्पेट फेयर अय्योजीत करने के साथ जर्मनी डोमोटेक्स में भी फेयर लगाया जाता है जिसमे सरकार का पूरा सहयोग मिलने से उद्योग को फायदा होता है।
    निर्यातक का का कहना है की  असलम महबूब, कालीन निर्यातक हांथो से बने खूबसूरत व रंग-बिरंगी कालीनो का काम विश्व में भारत के अलावा पाकिस्तान, ईरान जैसे कई देशों में होते थे लेकिन हस्तनिर्मित कालीनों पर मशीनमेड कालीनों का बड़ा प्रभाव पड़ने से दूसरे देशों में यह काम सिमट रहा है। लेकिन कला और परम्परा के नाते यह उद्योग भारत मे जिंदा है। देश मे यूपी के भदोही-मिर्जापुर, आगरा और दूसरे प्रदेशों में राजस्थान, कश्मीर सहित अन्य स्थानों पर हस्तनिर्मित कालीनों की बुनाई की जा रही है। निर्यात में एक बड़ा हिस्सा भदोही-मिर्जापुर का है। इसे लेकर निर्यातकों का मानना है कि देश के दूसरे हिस्सों से निर्यात बढ़ रहा है लेकिन भदोही में कोई खास इजाफा नही है इसके लिए सरकार को पहले से दी जाने वाली सुविधाओं में बढोत्तरी करनी चाहिए।

योगी के मंत्री ने उठाया ऐसा कदम अधिकारियों-कर्मचारियों में मचा हड़कम्प


भदोही। योगी सरकार के लघु उद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी ने एक ऐसा कदम उठाया है जिससे बीडा के अधिकारियों कर्मचारियों में हड़कम्प मचा हुआ हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने भदोही औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा लग्जरी कार दिए जाने की पेशकश को ठुकरा दिया है जिससे भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारी घबराए हुए हैं। बीडा द्वारा दस वर्ष में सपा-बसपा सरकार के उद्योग मंत्री व सचिव को जनता के पैसों से विभाग द्वारा कार व चालक उपलब्ध कराती थी साथ कि उसका पूरा खर्चा भी वहन करती थी ताकि उनके द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार पर कोई कार्यवाई न हो।

भदोही औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पूर्व की सरकारों में किये गए कारनामे किसी से छुपे नही हैं। यहां के कई अधिकारियों कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार करने के आरोप लग चुके हैं लेकिन उनपर कोई कठोर करवाई नही हुई बल्कि जांच तक कि फाइलों पर पर्दा डाला गया। आरोप है कि विभाग में बीते 10 वर्षो में कोई भी पूर्णकालिक अधिकारी की तैनाती नही हुई और प्रभार देकर इस प्राधिकरण को चलाया गया। इस दौरान प्राधिकरण द्वारा विकास के कोई विशेष कार्य भी नही कराये गए और पूर्व से बनी कालोनियों में भी कई तरह के कारनामे किये गए। इस सब कारनामो पर पर्दा डालने के लिए प्राधिकरण द्वारा लघु उद्योग मंत्री व सचिव को लग्जरी वाहन उपलब्ध कराया गया और चालक भी देने के साथ ईंधन सहित पूरा खर्च भी वहन किया गया। इस विभाग के पूर्व मंत्री रहे चंद्रदेव राम यादव भ्रस्टाचार के मामले में जेल तक जा चुके । इसका कई राजनीतिक लोग व संगठनों ने विरोध भी किया था। लोगो का आरोप के मुताबिक अधिकारी कारनामो पर पर्दा डालने के लिए यह सुख-सुविधा उपलब्ध कराते थे। विभाग की सूत्रों के मुताबिक एक बार फिर सरकार बदलते ही योगी सरकार में लघु उद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी को प्राधिकरण द्वारा कार देने की पेशकश की गई जिसे उन्होंने ठुकरा दिया है। इस पेशकश को ठुकराए जाने के बाद भ्रष्टाचार का आरोप झेल रहे अधिकारियों-कर्कमचरियो में दहशत है। उन्हें डर है कि कहीं उनकी पोल न खुल जाए। लेकिन मंत्री के इस कदम की कालीन नगरी में चर्चा है। लोगों को अब लग रहा है कि जल्द ही बीडा के कई मामलों की फाइल खुल सकती है। इस दौरान बीडा के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ व लघु उद्योग मंत्री तक बराबर शिकायते भी पहुंच रही हैं।

काला धन - स्विट्जरलैंड ने कई कालीन निर्यातकों से ब्यौरा मांगा

10 लोगो मे कई कालीन निर्यात भी शामिल 

नई दिल्ली/बर्न
विदेशों में जमा भारतीयों के कालेधन के खिलाफ अभियान को तेज करते हुए भारत ने स्विट्जरलैंड से कम से कम 10 लोगों और इकाइयों का बैंकिंग ब्योरा मांगा है। समझा जाता है कि इन लोगों ने अपना बेहिसाबी धन स्विट्जरलैंड के बैंकों में जमा किया है। इनमें दो सूचीबद्ध कपड़ा कंपनियां हैं, जबकि अन्य आर्ट क्यूरेटर और उसके *कालीन निर्यात कारोबार से जुड़ी हैं।*

स्विट्जरलैंड के टैक्स डिपार्टमेंट ने इन लोगों को पिछले सप्ताह नोटिस जारी कर 30 दिन में जवाब देने को कहा है। ये यूनिट्स 30 दिन में भारत के सूचना के आग्रह पर प्रशासनिक सहयोग प्रदान करने के फैसले के खिलाफ अपील कर सकती हैं। अपने स्थानीय नियमों के तहत ऐसे मामलों में स्विट्जरलैंड सरकार दूसरे देश के साथ सूचना साझा करने से पहले संबंधित लोगों को अपनी बात रखने का एक अंतिम अवसर देती।
यदि ये नोट संबंधित बैंक या टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा सीधे नहीं पहुंचाए जा सकते हैं तो इन्हें गजट अधिसूचना के जरिए सार्वजनिक किया जाता है। पिछले सप्ताह भारत से जुड़े लोगों और इकाइयों के संबंध में 10 नोटिस गजट में जारी किए। यह एक सप्ताह में किसी भी एक देश के मामले में सबसे ऊंचा आंकड़ा है। इन नोटिसों में दो कपड़ा कंपनियों में नियो कॉरपोरेशन इंटरनेशनल और एसईएल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लि. का नाम शामिल है।
इसके अलावा कई अन्य कंपनियां ऐसी हैं, जिनकी स्थापना टैक्स हेवन पनामा और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में की गई हैं।
 इनमें से ज्यादातर *कंपनियां और लोग कालीन निर्यात कारोबार और आर्ट क्यूरेटर से जुड़े हैं, जिनका परिचालन कई देशों में फैला हैं। इनमें अब्दुल राशीद मीर, अमीर मीर, साबेहा मीर, मुजीब मीर और तबस्सुम मीर शामिल हैं।*

इन नोटिसों में जो अन्य कंपनियां हैं, उनमें कॉटेज इंडस्ट्रीज एक्सपोजिशन, मॉडेल एसए और प्रोग्रेस वेंचर्स ग्रुप शामिल हैं। इनमें कुछ नाम लीक पनामा दस्तावेजों भी थे, लेकिन इन दो सूचीबद्ध कंपनियों सहित अन्य ने किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। भारत ने इससे पहले जिन लोगों या इकाइयों के बारे में सूचना मांगी थी उनमें कुछ सूचीबद्ध कंपनियां, रीयल एस्टेट कंपनी के पूर्व सीईओ, दिल्ली के एक पूर्व अधिकारी की पत्नी, दुबई स्थित भारतीय मूल के निवेश बैंकर, एक चर्चित भगौड़ा और उसकी पत्नी और यूएई की होल्डिंग कंपनी शामिल हैं।
  लंबे समय से कालीन में काले धन की शिकायतें सामने आती रहती थी लगातार उद्योग में गिरावट की बात करने वाले इस उद्योग आंकड़े में बढ़ती जा रही है कि बार यह शिकायते मिलती रही उद्योग में ओवर इंवॉइसिन की शिकायतें आम बात हो गई थी ऐसे यह समाचार उद्योग की मुश्किलें बढ़ा सकती है

800 to 1000 Crores Business & Enquiries Generated from 33rd India Carpet Expo

397 overseas carpet buyers from around 60 Countries and

  350 Buying Representatives/ Buying Houses  attended India Carpet Expo 2017


New Delhi, March 30, 2017: Carpet Export Promotion Council organized the 33rd Edition of India Carpet Expo from 27th to 30th March 2017 at Hall nos. 11, 12 & 12A Pragati Maidan, New Delhi, with an aim to promote the Cultural Heritage and showcase the weaving skills of Indian hand-knotted carpet artisans amongst the overseas hand-knotted carpet buyers. India Carpet Expo was inaugurated on 27th March 2017 by Hon’ble Textile Minister Smt. Smriti Irani in the august presence of Shri Ajay Tamta, Hon’ble Minister of State for Textiles and Shri Virender Singh, Hon’ble  Member of Parliament, Bhadohi. Dignitaries like Ms. Rashmi Verma, IAS, Secretary (Textiles), Shri J.K Dadoo Additional Secretary, Department of Commerce,             Shri Puneet Agarwal, Joint Secretary, Ministry of Textile, Smt. Babni Lal, Economic Advisor, Ministry of Textile, Smt. Aditi Das Raut, Trade Advisor, Ministry of Textile and Shri Ranjan Kumar, Commissioner, Vindhyachal Mandal, Mirzapur marked their presence in the Expo.

Shri Ajay Tamta, Hon’ble Minister of State for Textiles said, “Handmade Carpet Industry holds No. 1 Status in terms of value & quantity in export of handmade carpet. We are very glad that CEPC organizes this Expo twice every year to promote Indian weavers worldwide. Every year Expo generates huge amount of business. We assure our support to the carpet industry for their efforts for the betterment of small Manufacturers and artisans"
       
The Chairman of CEPC Mr. Mahavir Pratap Sharma, said “over 4000 enquiries and almost Rs. 800 to 1000 Crore business is expected from the 4 day Expo which shall be executed in the coming months. This year we are expecting Growth rate of about 8 to 9 percent in terms of dollar. This expo will lead to opening up of new market opportunity for the industry and shall help small and Medium Indian carpet exporters in promoting their products to overseas countries. Eventually, this ongoing process, on a broader scale, is instrumental in projecting” Make in India Brand” in overseas markets. Government has set up a target of almost Rs.11, 000 crore (US $ 1561 million) carpets & floor covering export for the fiscal year 2016- 2017, which he said shall be achieved. He further said Indian carpet expo is an ideal platform for International Carpet Buyers, Buying houses, buying Agents, Architects and Indian Carpet Manufacturers & Exporters to meet and establish long term business relationship. For the first time 60 countries participated in the expo, where buyers form countries like Bulgaria, Israel, Malaysia, Mauritius, Taiwan, Zimbabwe, Vietnam, Serbia, Hungary attended for the first time alongside countries like Australia, Brazil, Canada, China, Chile, Germany, Mexico, Russia, Singapore, South Africa, Turkey, U.K., USA, Japan etc.”

The Carpet Export Promotion  Council showcased  the products of more than 305 reputed small, medium and large manufacturer exporters from all over country viz U.P., Rajasthan, Haryana, Jammu and Kashmir, Punjab, Madhya Pradesh, Himachal Pradesh, Andhra Pradesh etc.  A record number of 397 overseas carpet buyers visited the expo to generate business for this rural based cottage sector. It is the endeavor of the Council to provide exclusive business environment to the both carpet importers as well as manufacturer-exporters, which ultimately will benefit about  2 million weavers and artisans employed in this highly labour intensive rural based MSME cottage industry.

397 overseas carpet buyers from around 60 Countries and
 350 Buying Representatives/ Buying Houses  attended India Carpet Expo 2017

New Delhi, March 30, 2017: Carpet Export Promotion Council organized the 33rd Edition of India Carpet Expo from 27th to 30th March 2017 at Hall nos. 11, 12 & 12A Pragati Maidan, New Delhi, with an aim to promote the Cultural Heritage and showcase the weaving skills of Indian hand-knotted carpet artisans amongst the overseas hand-knotted carpet buyers. India Carpet Expo was inaugurated on 27th March 2017 by Hon’ble Textile Minister Smt. Smriti Irani in the august presence of Shri Ajay Tamta, Hon’ble Minister of State for Textiles and Shri Virender Singh, Hon’ble  Member of Parliament, Bhadohi. Dignitaries like Ms. Rashmi Verma, IAS, Secretary (Textiles), Shri J.K Dadoo Additional Secretary, Department of Commerce,             Shri Puneet Agarwal, Joint Secretary, Ministry of Textile, Smt. Babni Lal, Economic Advisor, Ministry of Textile, Smt. Aditi Das Raut, Trade Advisor, Ministry of Textile and Shri Ranjan Kumar, Commissioner, Vindhyachal Mandal, Mirzapur marked their presence in the Expo.

Shri Ajay Tamta, Hon’ble Minister of State for Textiles said, “Handmade Carpet Industry holds No. 1 Status in terms of value & quantity in export of handmade carpet. We are very glad that CEPC organizes this Expo twice every year to promote Indian weavers worldwide. Every year Expo generates huge amount of business. We assure our support to the carpet industry for their efforts for the betterment of small Manufacturers and artisans"
       
The Chairman of CEPC Mr. Mahavir Pratap Sharma, said “over 4000 enquiries and almost Rs. 800 to 1000 Crore business is expected from the 4 day Expo which shall be executed in the coming months. This year we are expecting Growth rate of about 8 to 9 percent in terms of dollar. This expo will lead to opening up of new market opportunity for the industry and shall help small and Medium Indian carpet exporters in promoting their products to overseas countries. Eventually, this ongoing process, on a broader scale, is instrumental in projecting” Make in India Brand” in overseas markets. Government has set up a target of almost Rs.11, 000 crore (US $ 1561 million) carpets & floor covering export for the fiscal year 2016- 2017, which he said shall be achieved. He further said Indian carpet expo is an ideal platform for International Carpet Buyers, Buying houses, buying Agents, Architects and Indian Carpet Manufacturers & Exporters to meet and establish long term business relationship. For the first time 60 countries participated in the expo, where buyers form countries like Bulgaria, Israel, Malaysia, Mauritius, Taiwan, Zimbabwe, Vietnam, Serbia, Hungary attended for the first time alongside countries like Australia, Brazil, Canada, China, Chile, Germany, Mexico, Russia, Singapore, South Africa, Turkey, U.K., USA, Japan etc.”

The Carpet Export Promotion  Council showcased  the products of more than 305 reputed small, medium and large manufacturer exporters from all over country viz U.P., Rajasthan, Haryana, Jammu and Kashmir, Punjab, Madhya Pradesh, Himachal Pradesh, Andhra Pradesh etc.  A record number of 397 overseas carpet buyers visited the expo to generate business for this rural based cottage sector. It is the endeavor of the Council to provide exclusive business environment to the both carpet importers as well as manufacturer-exporters, which ultimately will benefit about  2 million weavers and artisans employed in this highly labour intensive rural based MSME cottage industry.



33rd India carpet expo 390 buyers registred in three days

New Delhi, 29th March, 2017: The 33rd Edition of India Carpet Expo, Organized by Carpet Export Promotion Council at Pragati Maidan, New Delhi, has received overwhelming response from around 390 buyers from across the world in the three days of the Expo. Sr. Officials from Centre and State Government i.e. Shri Puneet Agarwal, Joint Secretary, Smt. Aditi Das Raut, Trade Advisor, Smt. Babni Lal, Economic Advisor, Ministry of Textiles and Shri Ranjan Kumar, Commissioner, Vindhyachal Mandal, Mirzapur, marked their presence on the third day of the Expo. From creating new concepts about the carpets, to giving it a different perspective, that carpets should not only be used as floor covers but also wall hangings, this Expo has it all. Mr. Umar Hammeed, 2nd Vice Chairman, CEPC and M/s Hannan’s Oriental Rugs, the owner of the most expensive carpet in the Expo, while introducing his products explained the reason why this carpet is so expensive is that this “ 9/12 foot carpet has 2500 knots per square inch, which required 3 and a half years to be manufactured and is completely hand knotted Silk Carpet. This particular type of knotting process is called Sinnah. It’s also available in Iran, but they have different format of making it.” Mr. Nauman Waziri of M/s Waziri India, the owner of the Carpet Design Award 2017 for Innovations at Domotex International Trade Fair at Hannover (Germany) winning carpet for its unique design, said, “We wanted to change the characteristics of carpet, to be used as a wall hanging. The carpet is made up of only two colors in monochrome palate. The idea behind this carpet was to bring the nature to people on their walls, through carpet. The size of this carpet is 8/10 foot and is completely hand knotted. This wool and silk carpet took 3 months to be manufactured by 3 weavers working together to give my imagination of replacing the painting with the carpet, ashape.” Mr. Vijay Kapoor, M/s Kapoor Carpets, shares “We are in this industry since 1903 and have been part of this expo since the very beginning. Today M/s Kapoor Carpets is run by the fifth generation of the family tree. We have received ‘The Certificate of Honour’ at British Empire Exhibition held in London in 1924 and since then there is no turning back to us. The only thing we are lacking behind, in terms of industry is the unsuitable flexibility in price, which I would like to demand from the Govt. to look after.” The Expo is organized under the aegis of Govt. of India focuses on the Highly Labour Intensive Indian Handmade Carpet Industry and aims to provide employment to about 20 Lakhs workers/ artisans especially women directly or indirectly in the rural areas. With the participation of over 305 exhibitors, India Carpet Expo is one of the largest Handmade Carpet Fairs in Asia with a unique platform for the buyers to source the best handmade carpets, Rugs and other floor coverings under one roof.












Every Stall presents a New and Different Concept Creating new Opportunities for Business : Buyers

New Delhi, 28th March, 2017: The 33rd Edition of India Carpet Expo, Organized by Carpet Export Promotion Council at Pragati Maidan, New Delhi, has received overwhelming response from around 350 buyers from across the world in the second day of the Expo. India Carpet Expo “Showcasing new Fall-winter collection, as per the buyers’ requirements in terms of size, design, colour and quality which is grabbing the interest of the buyers. Rohit Paliwal from Jaipur Rugs says, “We have been participating here since last 10 years and every year there is a different demand and requirement among the buyers, It’s a kind of a bazaar where the buyers and sellers meet. Every year we launch a different collection, this year we have launched our ‘Unstring by Kavi’ collection and have got great response from the buyers. We think we are growing along with the industry every year.” Patrik, buyer from Neitherland says, “We have been coming here since last 3 years. Every year there is something new, something refreshing, they have new ideas and new concept to share and all of them in a pocket friendly rate. The best thing about this place is you get everything under one roof.” G S Anand from Anand Creations says, “We have been participating here since last 25 years and we keep on updating our collection every year as per the season and requirement of buyers. This year due to slow down in global market especially Europe and middle East the impact is evident in the expo. But as compared to last 20 years we have done very good business from this expo.” Hamid Tab, a Buyer from USA says, “My team always come here but for me, this is my first visit to the Expo. I must say it’s a very good opportunity, not only for the exhibitors but also the buyers like us. Everything here is such a great piece of work. Every stall has something new to say, you just can’t select your favorite one. I am sure I’m going to keep coming here again and again.” The Expo is organized under the aegis of Govt. of India focuses on the Highly Labour Intensive Indian Handmade Carpet Industry and aims to provide employment to about 20 Lakhs workers/ artisans especially women directly or indirectly in the rural areas. With the participation of over 305 exhibitors, India Carpet Expo is one of the largest Handmade Carpet Fairs in Asia with a unique platform for the buyers to source the best handmade carpets, Rugs and other floor coverings under one roof.





Textile Minister Smt. Smriti Irani inaugurated 33rd Edition of India Carpet Expo at Pragati Maidan

, New Delhi New Delhi, 27th March, 2017: The 33rd Edition of India Carpet Expo, Organized by Carpet Export Promotion Council at Pragati Maidan, New Delhi was inaugurated today with lamp lighting by Hon’ble Minister of Textile, Smt. Smriti Irani in the august presence of Shri Ajay Tamta, Hon’ble Minister of State for Textiles and Sri Virender Singh, Hon’ble Member of Parliament, Bhadohi. The Expo is organized under the aegis of Govt. of India with an aim to promote the Cultural Heritage and weaving skills of Indian hand-made Carpets and other floor coverings amongst the visiting overseas carpet buyers. Shri Ajay Tamta, Hon’ble Minister of State for Textiles in his press briefing mentioned that, “We are very glad that CEPC organizes this Expo twice every year to promote Indian weavers worldwide. Every year Expo generates huge amount of business. We have everything handmade and hand weaved here, which is the major attraction to the foreign buyers.” Shri Virender Singh, Hon’ble M.P., Bhadohi said, “We are planning to provide special privileges to the shepherds for the first time, as they play a crucial role in the process of carpet manufacturing. Until now all the focus was only on the weavers and manufacturers, but now we hope for the upliftment of the shepherds as well.” Mr. Mahavir Pratap Sharma, Chairman, CEPC said “India carpet expo is an ideal platform for International Carpet Buyers, Buying houses, buying Agents, Architects and Indian Carpet Manufacturers & Exporters to meet and establish long term business relationship. This exhibition is a crucial step towards taking Indian exports of Handmade carpet to much greater and newer heights. We have also set up a special theme pavilion wherein the experts of the industry are showcasing the process of carpet weaving through the concept of ergonomic and flexible tufting frame.” Mr. Sharma further added that orders worth over thousand crores are expected to be executed. New fall-winter colors and designs are being showcased at the Carpet Expo. India Carpet Expo is one of the largest Handmade Carpet Fairs in Asia with a unique platform for the buyers to source the best handmade carpets, Rugs and other floor coverings under one roof. With the participation of over 305 exhibitors, it has become a popular destination worldwide on Handmade Carpets. A record number of 410 overseas carpet buyers from around 60 countries mainly Australia, Brazil, Canada, China, Chile, Germany, Mexico, Russia, Singapore, South Africa, Turkey, U.K., USA etc. shall be visiting the Expo to generate business for this rural based cottage sector. It is the endeavor of the Council to provide exclusive business environment to the both carpet importers as well as manufacturer-exporters, which ultimately will benefit about 2 million weavers and artisans employed in this highly labour intensive rural based MSME cottage industry.




भदोही के 650 निर्यातको को पीएफ नोटिस - आयुक्त पी ऍफ़

भदोही: अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) व कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को मर्यादपट्टी स्थित कालीन भवन में कर्मचारी भविष्य निधि विषयक कार्यशाला में कर्मचारी भविष्य निधि व श्रम संगठन रोजगार मंत्रालय (भारत सरकार) के आयुक्त उपेन्द्र प्रताप ¨सह ने पीएफ पर पर कहा की इससे डरने की जरूरत नहीं है पी ऍफ़ किसी भी भी नियोक्ता का लॉन्ग टाइम रीटर्न है इससे नियोक्ता से कर्मचारी के बीच भवनात्मक रिश्ते बनते है कि पीएफ एक्ट वहीं लागू होता है जहां 20 कर्मचारी काम करते हैं। पीएफ के पैसे में सरकार का पैसा मिला कर दिया जाए तो कर्मचारी को राहत मिल सकती है। इसके लाभ के बारे में बताते हुए कहा कि जिसका पीएफ कटता है उसके परिवार को उस समय लाभ समझ में आता है जब दुर्भाग्य से कर्मचारी के साथ कोई हादसा हो जाए। 
ऐसी स्थि


ति में उसके परिवार को पेंशन देने का प्रावधान है। एकमा से सहयोग मांगते हुए कहा कि ऐसे मामलों बहुत से केस चल रहे हैं। मेरिट के आधार पर इन्हें समाप्त किया जायेगा। श्रम कानून को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है। कर्मचारियों का खुलासा करें। मार्च तक योजना है। अप्रैल से कड़े कदम उठाने के आदेश हैं। छूटे हुए लोगों के साथ दिक्कत आ सकती है। निर्यातकों से आह्वान करते हुए कहा कि आप यह देख लें जो आप के अंदर में काम कर रहे हैं। बताया कि 650 निर्यातकों का पीएफ में रजिस्ट्रेशन नहीं है उनको नोटिस भेजा गया है। कार्यशाला को शाहिद इकबाल ने भी संबोधित किया।
सीइपीसी के प्रथम उपाध्यक्ष सिद्धनाथ ¨सह ने कहा कि कालीन उद्योग को बालश्रम के नाम पर बदनाम किया गया। इसके चलते उद्योग पिछड़ गया है। इसे पटरी पर लाने के लिए अतिरिक्त प्रयास की जरूरत है। कार्यशाला में एकमाध्यक्ष गुलामन अंसारी, विनय कपूर, पीयूष बरनवाल, हाजी शौकत अली, अब्दुलरब, शमीम अंसारी, असलम महबूब, तनवीर हुसैन, मकसूद अंसारी, हाजी अब्दुल हादी, उमेश गुप्ता, शिवसागर तिवारी, जेपी गुप्ता, एचएन मौर्य, तिलकराज खन्ना, मो. रजा खां, हाजी रइस, अशफाक अंसारी, फिरोज वजीरी आदि उपस्थित रहे।

Siddh Nath Singh elect new Chairman Handicrafts and Carpet Sector Skill Council

Siddh Nath Singh was elected as Chairman of Handicrafts and Carpet Sector Skill Council (HCSSC) on 21, February 2017 (Tuesday) in a board meeting of the Council at New Delhi. Mr. Siddh Nath Singh is also 1st Vice-Chairman of the Carpet Export Promotion Council and he has been associated with carpet Industry for the last three decades.

         In today’s dynamic modern era where the whole world has transformed into small common market the role of skill artisan has become a need of the Handicrafts and Carpet industry and they need to be trained as per need of the Industry, said Shri Siddh Nath Singh, addressing meeting.

The HCSSC is promoted by Export Promotion Council for Handicrafts (EPCH), Carpet Export Promotion Council (CEPC) and NSDC and is focussing on skill development and training needs of Handicrafts and Carpet Sector.

Sri Atul Saluja, Sri Arshad Mir, Sri Rishi Soni were also selected as Co-Chairman, General Secretary and  Treasurer respectively during the meeting.

हस्तशिल्प मेले दिल्ली मेले में।,700 करोड़ रपये का कारोबार होने की उम्मीद जगी

ग्रेटर नोएडा, 20 फरवरी भाषा दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में 43वां भारतीय हस्तशिल्प एवं उपहार मेला आईएचजीएफ-दिल्ली 2017 का आयोजन हुआ जहां।,700 करोड़ रपये के संभावित कारोबार के लिए पूछताछ की गई।
हस्तशिल्प के लिए निर्यात संवद्र्धन परिषद के कार्यकारी निदेशक राकेश कुमार ने कहा कि आज समाप्त हुए
आईएचजीएफ दिल्ली-2017 में इस साल 91 देशों के खरीदारों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा कि मेले में इस साल खरीदारों की ओर से।,700 करोड़ रपये की व्यापारिक पूछताछ की गई है।

यह मेला दुनिया के सबसे बड़े हस्तशिल्प और उपहार मेले के 43वें संस्करण, आईएचजीएफ- 2017 के दिल्ली दिल्ली वसंतोत्सव का आरंभ 16 फरवरी, 2017 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे में होगा। लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड ने इसे एक ही छत के नीचे लगने वाले हस्तकला प्रदर्शकों को दुनिया के सबसे बड़े समूह के रूप में मान्यता दी है। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राकेश कुमार ने बताया कि यह मेला 1,97,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला था ।
      देश भर से 900 स्थायी बाजारों (मार्ट) सहित 3,000 से अधिक प्रदर्शक, चौदह उत्पाद श्रेणियों से संबंधित उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रदर्शित करेंगे जिनमें घरेलू बर्तन, होम फर्निशिंग, फर्नीचर, उपहार और सजावटी समान, लैंप और लाइटिंग क्रिसमस और उत्सवी सजावटी समान, फैशन गहने और सामान, स्पा, कारपेट और कालीन, बाथरूम सामान, उद्यान उपकरण, शैक्षिक खिलौने और गेम्स, हस्तनिर्मित कागज उत्पाद और स्टेशनरी तथा चमड़े के बैग शामिल थे ।
      अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इस मेगा मेले में 80 देशों से ज्यादा देशों के 6500 से अधिक विदेशी खरीददार, भारतीय घरेलू खरीददारों के आने की उम्मीद है। प्रदर्शनी के स्थान में बढोत्तरी और आगंतुकों की संख्या में वृद्धि से यह संकेत मिलता है कि यह मेला भारत के साथ साथ अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय के खरीददारों के लिए भी कितना महत्तवपूर्ण है। यह मेला यह भी दर्शाता है कि विदेशी और देशी खरीददारों के लिए कितना महत्वपूर्ण है जहां उनके लिए एक छत के नीचे घरेलू संबंधी, लाइफस्टाइल, फैशन और कपड़ा उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं।
            घर, जीवन शैली, फैशन और वस्त्र उद्योग के लिए दुनिया के सबसे बड़े शो में कच्चे माल से निर्मित 2,000 से अधिक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृखंला पेश की जाएगी जिसमें  लकड़ी, धातु, बेंत और बांस, प्राकृतिक रेशों से बने वस्त्र, ऊन, रेशम, जूट, पत्थर, चमड़े, टेराकोटा, लाख और वनस्पति रंग शामिल हैं।
      इस शो के मुख्य आकर्षणों के तहत उत्तर पूर्वी क्षेत्र और जोधपुर मेगा क्लस्टर के उत्पादों की एक विषयगत प्रदर्शनी प्रस्तुत की जाएगी। लकड़ी के उत्पादों, लकड़ी के हस्तशिल्प वस्तुओं पर एक मंडप इसमें लगा रहेगा। उत्पादन तकनीक, कौशल विकास, जीएसपी योजना, प्रवृत्तियां और पूर्वानुमान, केंद्रीय बजट और आगामी जीएसटी पर चर्चा करने के लिए संबंधित जानकारीपूर्ण सेमिनार भी इस दौरान आयोजित किए जाएंगे।
      घरेलू खुदरा बाजार में अभूतपूर्व वृद्धि को साकार करने के उद्देश्य से परिषद ने ऑटम 2014 के दौरान घरेलू खुदरा व्यापारियों और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए आईएचजीएफ -दिल्ली मेले के दरवाजे खोल दिये थे। तब से, प्रमुख खुदरा ब्रांड और ई कॉमर्स कंपनियां जैसे- गुड अर्थ, फर्नीचर रिपब्लिक, फैब इंडिया, वेस्ट साइड, आर्चीज लिमिटेड, डीएलएफ ब्रांड्स लिमिटेड, @होम, शॉपर्स स्टॉप, लाइफस्टाइल ग्रुप, अरबन लैडर.कॉम, पीप्पेरफ्राई.कॉम, अजियो.कॉम, फैब फर्निश.कॉम, शॉपक्लूज.कॉम सहित अन्य दूसरी कंपनिया इस मेले में नियमित रूप से भाग ले रही हैं। इन कंपनियों ने मेले में भाग लेने के लिए खुद का पंजीकरण कराया है।
      मीडिया के साथ बातचीत में ईपीसीएच के ईडी श्री राकेश कुमार ने बताया कि 1994 में अपनी स्थापना के बाद से, आईएचजीएफ- दिल्ली मेले ने भारत के हस्तशिल्प व्यापार मे एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसने मेले में न केवल बड़ी संख्या में भारतीय निर्यातकों को भाग लेने के लिए सक्षम बनाया है बल्कि विदेशी खरीदारों को भी एक ही स्थान पर एक ही छत के नीचे उनकी आवश्यकता की चीजें मुहैया करायी हैं। उन्होंने कहा कि आईएचजीएफ द्वारा निभायी गयी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका से देश की विदेशी मुद्रा आय में बढ़ोत्तरी हुई है और इससे रोजगार भी पैदा हुए हैं।
      ईपीसीएच के चैयरमैन श्री दिनेश कुमार ने कहा कि यह हकीकत है कि अमेरिका और यूरोप भारत के प्रमुख खरीददार हैं लेकिन इसके बावजूद ईपीसीएच अब अपना ध्यान लातिन अमेरिका, मध्य एशिया, अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया जैसे नए उभरते बाजारों पर केंद्रित कर रहा है।
      अप्रैल 2016  से दिसंबर 2016 के दौरान हस्तशिल्प के निर्यात में 12.10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी, जो रूपये के संदर्भ में 17,939.05 रुपये करोड़ है। डॉलर के संदर्भ 2673.48 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात के साथ इसमें 8.25% की वृद्धि दर्ज की गयी। ईडी, ईपीसीएच ने बताया कि वर्ष 2016-17 के लिए निर्यात लक्ष्य 3600 मिलियन डॉलर (23,560.00 करोड़ रुपये) का रखा गया है और परिषद को उम्मीद है कि यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा।
      हस्तशिल्प निर्यात के विकास को बढ़ावा देने के लिए ईपीसीएच देश की एक नोडल एजेंसी है।

डीआरआई ने किया कालीन व्यवसायी को गिरफ्तार

 भदोही: राजस्व घोटाले के आरोप में शुक्रवार को नगर के एक कालीन व्यवसायी को दिल्ली से आई राजस्व अभिसूचना निदेशालय (डीआरआई) की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। गुप्त रूप में हुई इस कार्रवाई के बाद टीम आरोपी को लेकर रवाना हो गई। मामला क्या है तथा कितना बड़ा है इससे स्थानीय पुलिस और आला अधिकारी भी अनभिज्ञता जता रहे हैं। लगभग एक सप्ताह से नगर स्थित एक होटल में गुप्त रूप से ठहरे डीआरआई टीम के सदस्यों ने शुक्रवार को स्थानीय पुलिस के सहयोग से बाजार सलावत खां मोहल्ला निवासी इरफान अहमद नामक कालीन व्यवसायी को घर से गिरफ्तार किया। गुप्त रूप से हुई इस कार्रवाई के तत्काल बाद टीम उसे लेकर लौट गई। घोटाला कितना बड़ा है तथा मामला क्या है इससे स्थानीय पुलिस भी अनभिज्ञ है। शहर कोतवाल कपिलदेव यादव का कहना है कि डीआरआई के इंटेलिजेंस अफसर ज्ञानेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम आई थी। उनका कहना था कि ड्यूटी ड्रा बैक के मामले में करोड़ों का घोटाला हुआ है। इस मामले में संबंधित विभाग के अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने कोई जानकारी देने से इंकार कर दिया। बताया जा रहा है कि कालीन एक्सपोर्ट में मिलने वाले ड्यूटी ड्रा बैक को हासिल करने के लिए कुछ लोगों द्वारा धांधली की जाती है। इसी से संबंधित उक्त मामला हो सकता है। हालांकि जब तक अधिकारिक पुष्टि नहीं होती कुछ कहा नहीं जा सकता।
वैसे एक स्थानीय अख़बार में खबर छपने के बाद इस तरह के काम करने वालो के बीच दहसत दिखी पड़ा है हलाकि मामले में कितने लोग शामिल है यह बाद में ही पता चल सकेगा 


सीईपीसी के पदाधिकारियों ने ली शपथ

भदोही: कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के निर्विरोध निर्वाचित पदाधिकारियों ने गुरुवार को शपथ ग्रहण किया। नोएडा स्थित एक होटल में आयोजित परिषद की वार्षिक सामान्य सभा के दौरान पदाधिकारियों ने शपथ लेते हुए कालीन उद्योग की बेहतरी व विकास के लिए काम करने पर बल दिया। परिषद के रिक्त पदों प्रथम उपाध्यक्ष, द्वितीय उपाध्यक्ष तथा पांच प्रशासनिक समिति के सदस्यों के लिए चुनाव होना था। हालांकि नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन तक दूसरे गुट की ओर से नामांकन न होने के कारण सभी पदाधिकारी व सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हो हुए थे। हालांकि इसकी घोषणा व शपथ ग्रहण पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गुरुवार को किया गया। नोएडा स्थित एक होटल में आयोजित परिषद की वार्षिक सामान्य सभा के दौरान निर्वाचित पदाधिकारियों प्रथम उपाध्यक्ष (यूपी) सिद्धनाथ सिंह, द्वितीय उपाध्यक्ष (जम्मू काश्मीर) उमर हमीद ने पद व गोपनीयता की शपथ ली। इसी के साथ निर्वाचित पांच प्रशासनिक सदस्यों में उत्तर प्रदेश कोटे से हाजी अब्दुलरब अंसारी, राजेन्द्र कुमार मिश्र, हुसैन जाफर हुसैनी, तथा शेष भारत से बोधराज व जम्मु काश्मीर से सतीश वाटल ने शपथ लिया। सभी पदाधिकारियों व सदस्यों ने कालीन उद्योग के विकास व बेहतरी के लिए मिलजुल कर कार्य करने का संकल्प लिया।1 वार्षिक सभा के दौरान उपस्थित प्रशासनिक समिति के वरिष्ठ सदस्य उमेश कुमार गुप्ता मुन्ना, वासिफ अंसारी, हाजी फिरोज वजीरी, ओंकारनाथ मिश्र बच्चा, भरतलाल मौर्य, घनश्याम शुक्ला, इश्तियाक खां अच्छू आदि ने पदाधिकारियों व सदस्यों को बधाई दी। भारत सरकार की नई नीति के तहत प्रथम उपाध्यक्ष ही आगे चलकर परिषद के चेयरमैन होगा। यानी वर्तमान चेयरमैन महावीर उर्फ राजा शर्मा के रिटायर होने के बाद सिद्धनाथ सिंह स्वत: चेयरमैन पद पर कायम हो जाएंगे।जागरण संवाददाता, भदोही: कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के निर्विरोध निर्वाचित पदाधिकारियों ने गुरुवार को शपथ ग्रहण किया। नोएडा स्थित एक होटल में आयोजित परिषद की वार्षिक सामान्य सभा के दौरान पदाधिकारियों ने शपथ लेते हुए कालीन उद्योग की बेहतरी व विकास के लिए काम करने पर बल दिया।

परिषद के रिक्त पदों प्रथम उपाध्यक्ष, द्वितीय उपाध्यक्ष तथा पांच प्रशासनिक समिति के सदस्यों के लिए चुनाव होना था। हालांकि नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन तक दूसरे गुट की ओर से नामांकन न होने के कारण सभी पदाधिकारी व सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हो हुए थे। हालांकि इसकी घोषणा व शपथ ग्रहण पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गुरुवार को किया गया। नोएडा स्थित एक होटल में आयोजित परिषद की वार्षिक सामान्य सभा के दौरान निर्वाचित पदाधिकारियों प्रथम उपाध्यक्ष (यूपी) सिद्धनाथ सिंह, द्वितीय उपाध्यक्ष (जम्मू काश्मीर) उमर हमीद ने पद व गोपनीयता की शपथ ली। इसी के साथ निर्वाचित पांच प्रशासनिक सदस्यों में उत्तर प्रदेश कोटे से हाजी अब्दुलरब अंसारी, राजेन्द्र कुमार मिश्र, हुसैन जाफर हुसैनी, तथा शेष भारत से बोधराज व जम्मु काश्मीर से सतीश वाटल ने शपथ लिया। सभी पदाधिकारियों व सदस्यों ने कालीन उद्योग के विकास व बेहतरी के लिए मिलजुल कर कार्य करने का संकल्प लिया।1 वार्षिक सभा के दौरान उपस्थित प्रशासनिक समिति के वरिष्ठ सदस्य उमेश कुमार गुप्ता मुन्ना, वासिफ अंसारी, हाजी फिरोज वजीरी, ओंकारनाथ मिश्र बच्चा, भरतलाल मौर्य, घनश्याम शुक्ला, इश्तियाक खां अच्छू आदि ने पदाधिकारियों व सदस्यों को बधाई दी। बताते चलें कि भारत सरकार की नई नीति के तहत प्रथम उपाध्यक्ष ही आगे चलकर परिषद के चेयरमैन होगा। यानी वर्तमान चेयरमैन महावीर उर्फ राजा शर्मा के रिटायर होने के बाद सिद्धनाथ सिंह स्वत: चेयरमैन पद पर कायम हो जाएंगे।

एक्सपो मार्ट में पांच दिवसीय हस्तशिल्प मेला शुरू

नोएडा  नॉलेज पार्क स्थित एक्सपो मार्ट में इंडियन हैंडीक्राफ्ट एंड गिफ्ट फेयर (दिल्ली फेयर) का  गुरुवार को केंद्रीय कपड़ा सचिव रश्मि वर्मा ने लिम्का बुक में शामिल इंडियन हैंडीक्राफ्ट एंड गिफ्ट फेयर (दिल्ली फेयर) पांच दिवसीय मेले का दीप जला कर शुभारंभ किया।
कपड़ा सचिव ने एक छत के नीचे व्यापक रूप से हस्तशिल्प उत्पादों का बाजार आयोजित कराने के लिए लिम्बा बुक आफ रिकॉर्ड में शामिल होने पर बधाई दी।
उन्होंने कहा कि हर साल निर्यातक व कारीगर नए उत्पाद लेकर बाजार में आते हैं। नए डिजाइन व हाथ से बने सामानों की कारीगरी के दम पर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल लगातार उंचाईयों को चूम रहा है। कई देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद भी हम विश्व बजार में लगातार लक्ष्य के अनुपात में आगे बढ़ रहे हैं।
यह हमारे लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि निर्यातक व खरीदार एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के माध्यम होम फैशन, लाइफ स्टाइल, ज्वैलरी व कपड़े के निर्यात मामले में दुनिया भर में ब्रांड इंडिया की छवि तैयार करेगा।

उन्होंने कहा कि दुनिया भर के देशों में शीशम व रोजवुड के लकड़ी से बने उत्पाद के निर्यात पर वृक्ष पंजीकरण पर भी संतोष जताया व कहा कि वृक्ष प्रमाण पत्र लकड़ी के कारोबारियों के लिए संजीवनी साबित होगा।
एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के कार्यकारी निदेशक राकेश कुमार ने बताया कि बार बड़ी तादाद में अंतरराष्ट्रीय खरीदार कंपनियां व कई स्टोर्स भी आ रहे हैं।
इनमें न्यू एडिशन, होम बीवी, नीदरलैंड, टोक एंड स्टोक, ब्राजील, ईएंडएल, आस्ट्रेलिया, रूस, अमेरिका, एक्सेंट डेकोर, अमेरिका टूज कंपनी इंक, अमेरिका से कंगारू जीएमबीएच जर्मनी की कोपिको, वेनिजुएला ग्रेटर नोएडा आ रही है।
इसके अलावा कई रिटेल के खुदरा खरीदारी करने वाली ई-कॉमर्स कंपनियां आ रही है। इनमें गुड अर्थ, फर्नीचर रिपब्लिक, फैब इंडिया, वेस्ट साइड, आर्चीज लिमिटेड, डीएलएफ ब्रांडस लिमिटेड, शॉपर्स स्टाप, लाइफ स्टाइल ग्रुप, अर्बनलैंडर डॉट कॉम, पेपर फ्राइ डॉट कॉम, फैबफर्निश डॉट कॉम व शॅपक्लूज डॉट कॉम आ रही है।
इस अवसर पर हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास आयुक्त आलोक कुमार, नोएडा -ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ दीपक अग्रवाल, ईपीसीएच अध्यक्ष दिनेश कुमार, ईपीसीएच के उपाध्यक्ष ओपी प्रह्लादका, सागर मेहता, फेयर के अध्यक्ष विवेक विकास, मेला उपाध्यक्ष केएस यादव सहित अन्य लोग मौजूद थे।

कार्पेट ,लेदर, और जेम ऐंड जूलरी के एक्सपोर्ट में गिरावट

लेदरकार्पेट और जेम ऐंड जूलरी जैसे लेबर का अधिक इस्तेमाल करने वाले सेक्टर्स के एक्सपोर्ट में कमी दर्ज की 

जनवरी में निर्यात 4.3% बढ़ा, व्यापार घाटा करीब 65,615 करोड़ रुपये

नई दिल्ली अमेरिका, यूरोप और जापान से मांग बढ़ने की वजह से जनवरी में लगातार पांचवें महीने देश से निर्यात बढ़ा है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि नोटबंदी का निर्यात पर उतना असर नहीं हुआ है, जितनी आशंका जतायी जा रही थी। हालांकि, आयात में तेजी से हुई बढ़ोतरी से व्यापार घाटे में वृद्धि हुई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में एक्सपोर्ट 4.3 पर्सेंट बढ़कर 22.1 अरब डॉलर का रहा। आयात में 10.7 पर्सेंट की वृद्धि दर्ज की गयी और यह 31.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे जनवरी में 9.8 अरब डॉलर (करीब 65,615 करोड़ रुपये) का व्यापार घाटा रहा, जो एक वर्ष पहले के इसी महीने में 7.6 अरब डॉलर (करीब 50885 करोड़ रुपये) का था। जनवरी में गोल्ड इंपोर्ट लगभग 30 पर्सेंट घटकर 2.04 अरब डॉलर रह गया।


एक्सपोर्ट करने वाले 30 सेक्टर्स में से 17 की शिपमेंट बढ़ी है, लेकिन लेदर, कार्पेट और जेम ऐंड जूलरी जैसे लेबर का अधिक इस्तेमाल करने वाले सेक्टर्स के एक्सपोर्ट में कमी दर्ज की गयी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि कुल ट्रेड बैलेंस में सुधार हुआ है। 2016 में ग्लोबल ट्रेड ग्रोथ करीब 1.7 पर्सेंट रहने का अनुमान है। EEPC इंडिया के चेयरमैन टी एस भसीन ने कहा, 'व्यापार के सकारात्मक आंकड़ों से देश के एक्सपोर्ट को और मजबूत करने के लिए आधार बनेगा। इसे अमेरिका और यूरोप में मांग बढ़ने से मदद मिलेगी।'

ऊंचे क्रूड प्राइसेज से एक्सपोर्ट को मदद मिली है। नॉन-ऑइल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में इंजिनियरिंग गुड्स का प्रदर्शन अच्छा रहा, जबकि जेम ऐंड जूलरी और फार्मास्युटिकल सेक्टर्स के एक्सपोर्ट में गिरावट दर्ज की गई। जनवरी में ऑइल इंपोर्ट 61 पर्सेंट बढ़कर 8.14 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि नॉन-ऑइल इंपोर्ट 23.8 अरब डॉलर के साथ फ्लैट रहा। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस के प्रेजिडेंट एस सी रल्हन ने बढ़ते संरक्षणवाद, करेंसीज में उतार-चढ़ाव और एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए अन्य चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया, 'मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए हमें इस फाइनैंशल इयर में लगभग 270 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट का अनुमान है

निर्यात के समय कस्टम जाँच , मूल्याकन के लिए नहीं काटे कालीन -कपडा मंत्री

नयी दिल्ली निर्यात के समय कस्टम द्वारा जाँच के लिए कालीन को कटे जाने की शिकायते को गंभीरता से लेते हुए केन्द्रीय कपडा मंत्री ने वित् मंत्रालय के अधिकारियो को निर्देशित किया है शुक्रवार को
केन्द्रीय  वस्त्र मंत्री श्रीमति स्मृति ज़ुबीन ईरानी ने अपने कार्यालय में निर्यात होने वाले किसी भी कालीन को काटने के संबंध में निर्यातकों से
शिकायत मिलने पर वित्त मंत्रालय के श्री नजीब शाह  चेयरमैन सैंट्रल बोर्ड आॅफ इक्साईज एंड कस्टम तथा श्री दिनेश  गुप्ता निर्देषक (ड्राबैक) के साथ एक बैठक बुलवाई जिसमंे वस्त्र सचिव श्रीमति रष्मि वर्मा अतिरिक्त सचिव श्रीमति पुश्पा सुर्बमणियम विकास आयुक्त श्री अलोक कुमार तथा श्री सुषील गायकवाड अतिरिक्त विकास आयुक्त के साथ   कालीन निर्यात संवर्धन परिशद् की तरफ से भावी वाइस चेयरमैन श्री ऊमर हामिद कार्यकारी निर्देषक श्री शिव  कुमार गुप्ता एवं श्री निर्मल कुमार गुईन भी उपस्थित थे।
वस्त्र मंत्री ने वित्त विभाग के अधिकारीयों को निर्यातकों के कस्टम अधिकारी  कारपेट काटे जाने की कार्यवाही से निर्यात में होने वाली विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया। विचार विमर्ष में  यह फैसला लिया गया कि भविष्य  में निर्यात होने वाले किसी भी कालीन को उनके कम्पाजिषन मूल्यांकन आदि के लिये नहीं काटा जायेगा तथा टैक्सटाईल काॅमेटी मुबंई या इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ कारपेट टेक्नोलाॅजी (आई.आई.सी.टी.) भदोही का सहयोग लेकर मूल्यांकन या काॅमपोजिषन का आंकलन निर्यात के लिये किया जायेगा।

श्री महावीर (राजा) षर्मा चेयरमैन श्री अबदुल रब वाईस चेयरमैन श्री ऊमर हामिद भावी वाईस चेयरमैन एवं भावी प्रथम उपवाईस चेयरमैन श्री सिद्ध नाथ सिंह श्री उमेष गुप्ता
एवं सभी काॅमेटी मेंबर्स कालीन उद्योग की तरफ से माननिय वस्त्र मंत्री जी का इस पहल का स्वागत किया।


                                                     PRESS RELEASE  

Today, 10th February, 2017, the Hon’ble Textile Minister Smt. Smriti Zubin Irani held a meeting with Mr. Najeeb Shah, Chairman, Central Board of Excise & Customs & Shri Dinesh Gupta, Director (Drawback) and Ministry of Finance in her chamber regarding the issue raised by  the Carpet Exporters for damaging carpets by the Port Authorities for price determination, composition etc. meant for exports.   In the above meeting Smt. Rashmi Verma, Textiles Secretary, Smt. Pushpa Subrahmanyam, Addl. Secretary, Ministry of Textiles, Shri Alok Kumar, Development Commissioner (Handicrafts) and Shri Sushil Gaikwad, Addl. Development Commissioner (Handicrafts) were present.  From CEPC Shri Umer Hameed, Member COA who is also the  would be 2nd Vice-Chairman,  Shri Shiv Kumar Gupta, Executive Director & Shri Nirmal Kumar Guin were also present.

The Hon’ble Textiles Minister Smt.Zubin Irani apprised the officials of Finance Ministry that due to cutting of carpets, the carpets are damaged and the exporters cannot realize the value of their carpets which discourage them for exports. They face other relevant problems also in exports. Mr. Najeeb Shah understood the problem and assured the Hon’ble Textile Minister that a mechanism in consultation with the Textiles Ministry can be worked out for price verification and composition etc. so that cutting of the carpets meant for exports shall be avoided. After discussing the matter with the above officials the Hon’ble Textile Minister stated that for price determination and composition etc. there shall be no cutting of the carpets meant for exports and the port authorities can seek assistance of the O/o. the Textiles Committee, Mumbai and the Indian Institute of Carpet Technology, Bhadohi


     Shri Mahavir (Raja) Sharma, Chairman, CEPC Shri Abdul Rub, Vice-Chairman, CEPC, Mr. Umesh Kumar Gupta, Member COA, Umer Hameed, Shri Siddh Nath Singh would be First Vice-Chairman and all Committee Members of CEPC on behalf of the Carpet Industry welcome the above initiative of the Hon’ble Textile Minister for resolving the long pending demand of the Carpet Industry. 



On a date with data-mining

Plastic buckets for Rs 70,000 a unit. Razor blades for Rs 8,000 a piece. And diamonds for Rs 900 a carat. These are not fantasy prices. These are actual prices used by people to launder money camouflaged as ‘international trade’ through exorbitantly highvalued import invoices and ridiculously low-valued export invoices. As GoI steps up its efforts to root out black money from the economy, it needs to create a team of experts that can put together disparate data sets and analyse them cleverly to detect money laundering and tax evasion. Money launderers usually exploit inadequate coordination between various agencies of the government to carry out their activities. To offset this, advances in big-data analysis and data mining must be exploited. This effort requires two important changes in mindset. First, the reliance on anecdotes and ‘theories’ postulated by bureaucrats using their ‘personal experiences’ need to be shelved.
It is dangerous to extrapolate to all of Bureaucrat A’s personal experiences serving in, say, the Kerala cadre or Bureaucrat B’s experiences serving in, say, the Jammu and Kashmir cadre. As Nobel-winning research in behavioural economics by Daniel Kahneman demonstrates, the personal experiences of even the most rational individuals shape their ‘theories of life’. Such small sample evidence can’t substitute for systematic empirical evidence. As Sherlock Holmes said, one should theorise only after all the data are in. Second, information as power acts as a double-edged sword. Information-sharing becomes the victim of jostling for power among the various departments in a bureaucracy. Thus, one department won’t share data with another unless it is forced to do so.
To circumvent this, GoI needs to set up a commission with the mandate and the personnel to demand data from any department; put the disparate data sets together; and analyse them to gain insights. Take the use of data mining to detect money laundering. The use of international trade to move money, undetected, from one country to another is one of the oldest tricks in the book. Assume a criminal wants to launder Rs 100 crore to Pakistan.
He would need to have a Pakistani exporter to collude on the transaction. First, the exporter would purchase 1,000 carpets for Rs 1,000 each, thus costing Rs 10 lakh. Second, he would export the 1,000 carpets to the Indian importer for Rs 10 lakh a carpet, resulting in atotal invoice of Rs 100 crore. Third, the Indian importer receives the 1,000 carpets worth Rs 10 lakh but pays the Pakistani exporter Rs 100 crore. As a result, Rs 100 crore has been moved to Pakistan for a cost of Rs 10 lakh.
An alternative method used is through the undervaluation of domestic exports. Research of money laundering in the US indicates a majority of the money laundered is through undervalued exports. This is the preferred option for two reasons. One, most governments don’t adequately monitor their export transactions. Two, it allows the launderer to avoid the use of financial institutions that may be monitored by government agencies. Detecting such transactions requires careful and systematic analysis of data. This is because the local tax official may be aware of the nature of this business and may turn a blind eye in return for a sizeable bribe. The money launderer converts his illegal money into products by purchasing products for cash at the product’s market price.
These products are then exported to a foreign colluding importer at below market prices. The importer receives the undervalued exports and resells them in the market at the real prices that reflect their true value. To detect such transactions, import-export data at a daily frequency need to be carefully assembled. The quality of the data needs to be checked by undertaking statistical and econometric tests for missing fields, intentional fabrication and modification of data, etc. Once such data is assembled, suspicious transactions can be flagged using prices that are very high or very low by examining the statistical distribution of prices.
Such flags can then be used for welldirected audits. Advances in machine learning and analysis of big data provide several opportunities that the government can use to catch money launderers. What is important is for political and bureaucratic will to exploit these opportunities.
(The writer is associate professor of finance, Indian School of Business, Hyderabad)
article by http://blogs.economictimes.indiatimes.com/et-commentary/on-a-date-with-data-mining/

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